झख मार रहे हैं

झख मार रहे हैं

एक दिन जमुना किनारे एक मल्लाह मछलियों का शिकार कर रहा था उसी समय बीरबल के साथ अकबर बादशाह भी वहाँ पर जा पहुँचा ।मल्लाह को मछलियां मारते हुए देखकर बादशाह को भी शौक हुआ और वह भी वहीं बैठकर मछलियाँ मारने लगा । मछलियाँ मारते मारते उसे कोई ऐसा काम स्मरण हो आया कि उसे बीरबल को बेगम के पास भेजना पड़ा । बीरबल हुक्म पाकर बेगम से जा मिला । बेगम ने बीरबल से पूछा-“बादशाह क्या कर रहे हैं?” बीरबल ने कहा-”कर क्या रहे हैं, जमुना जी के किनारे बैठे बैठे झख मार रहे हैं ।”

बीरबल के मुख से यह उत्तर पाकर बेगम भीतर ही भीतर बड़ी नाराज हुईं, परन्तु बीरबल से कुछ बोल न सकीं। जब रात्रि समय में बादशाह आया तो वह कुपित होकर बोली-“महाराज ! बीरबल को आपने बहुत सर पर चढ़ा लिया है, जिस कारण वह बड़ा ढीठ होता जा रहा है ।

वह आपके बारे में पूछने पर मुझसे कह गया है कि आप झख मर रहे हैं ।आप उसे ऐसा दंड दीजिये ताकि वह फिर से ऐसी गुस्ताखी न कर सके।”

यह सुनकर बादशाह को बड़ा विस्मय हुआ और उसी समय बीरबल को दंड देने का प्रण किया । कुछ समय बाद चपरासी को भेजकर बीरबल को बुलवाया गया ।जब वह आया तो बादशाह ने कहा-“बीरबल तुम बड़े घमंडी हो गए हो।” बीरबल बोला-“जहाँपनाह ! ऐसा बिलकुल भी नहीं  है, परन्तु यदि मुझसे कोई अपराध हुआ हो तो आपको अधिकार है कि मुझे दंड दें ।”

बादशाह तो बेगम से सब सुन ही चुका था । वह बोला-“तुमने बेगम से मेरे बारे में क्या कहा था, मुझसे झख मरवाते थे, क्या यह सही नहीं है ?”

बीरबल बाअदब हाथ जोड़कर बोला-“जहाँपनाह ! मेरी गुस्ताखी माफ़ की जावे तो कहूँ । मेरी जुबान में यानि कि संस्कृत में मछली को झख कहते हैं और आप उस समय मछली ही मार रहे थे । अतएव मैंने बेगम के पूछने पर, आप झख मार रहे हैं, ऐसा ही बताया था ।” बीरबल के इस उत्तर से बादशाह और बेगम दोनों ही प्रसन्न हो गए और बीरबल को पुरस्कार देकर विदा किया ।

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